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सन्दर्भ : पराग ऑनर लिस्ट

बच्चों के सामान्य और स्कूली जीवन में बाल साहित्य की अहमियत को सभी स्वीकारते हैं। बच्चों के चहुँमुखी व्यक्तित्व (समग्र) विकास में साहित्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। यही वजह है कि देश के नीतिगत और पाठ्यचर्या दस्तावेज़ बच्चों और किशोरों को स्कूल में पाठ्य पुस्तकों के साथ अच्छा साहित्य उपलब्ध कराने की पुरज़ोर सिफारिश करते है।

पठन संस्कृति के विकासक्रम में बाल साहित्य की अहम् भूमिका होती है। साहित्य की अच्छी किताबें बाल पाठकों के लिए ज्ञान, जानकारी और मनोरंजन के मूल्यवान स्रोत तो होती ही हैं, इन्हें पढ़ने से बच्चों को आनन्द के साथ सीखने और एकाग्रता के अवसर बनते है, उनमें स्वाध्याय की आदतों का विकास होता है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर राज्य व्यवस्था और कई स्वयंसेवी संस्थाएँ स्कूल पुस्तकालयों के माध्यम से बच्चों तक श्रेष्ठ किताबें पहुँचाने की योजनाएँ चलाती रहती हैं।

बाल साहित्य के खजाने में नानाप्रकार की कविता, कहानी, नाटक, यात्रा वृतान्त, लोक कथाओं व चित्र कहानियों, पहेलियों आदि की किताबें तो होती ही हैं, इनमें तरह-तरह की ज्ञान व जानकारीपरक और शैक्षिक खेलों से जुड़ी किताबें भी होती हैं। ये किताबें बच्चों और किशोरों में सृजनशीलता, कल्पनाशीलता, तार्किकता, नैतिकता, करूणा और संवेदनशीलता जैसे मूल्यों को पोषित करती है और उन्हें स्वाध्याय के लिए प्रेरित करती हैं।

हमारे देश में सैकड़ों प्रकाशक बच्चों के लिए हज़ारों की संख्या में बाल साहित्य की किताबें छापते है। लेकिन ऐसे प्रकाशकों की संख्या उँगलियों पर गिनने लायक ही है जो बच्चों के साहित्य को गंभीरता से लेते है और पूरी तैयारी और गहरी समझ और के साथ साहित्य प्रकशित है और उचित दाम पर बेचते हैं। बच्चों के जीवन में बाल साहित्य की अहमियत को समझते हुए सभी चाहते हैं किसी भी तरीके या माध्यम से उन तक पहुँचने वाला साहित्य बेहतरीन हो। इन प्रकाशित पुस्तकों के बारे में लोगों के मन में कहीं यह सवाल बना रहता है कि इसमें बच्चों के लिए कौन-सी पुस्तकें खरीदी जाएँ ? कौन सी पुस्तकें बच्चों को पढ़ने को दी जानी चाहिए ? इस तरह के सवाल आम माता-पिता और शिक्षकों के भी होते हैं जो बच्चों के लिए किताबें खरीदना चाहते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में बच्चों के लिए किताबों की एक सूची की दरकार रहती है जो आम लोगों व बच्चों को अच्छी किताबें खरीदने की दिशा दे सकें।

लेकिन विडंबना है कि हमारे देश में ऐसी कोई सुविचारित व्यवस्था या पहल नहीं है जिससे बच्चों को बेहतरीन बाल साहित्य उबलब्ध कराने से सरोकार रखने वाले व्यक्ति यह जान सकें कि विविध भाषाओँ में बाल साहित्य की उत्कृष्ट किताबें कौन-सी हैं।

इस कमी को पूरा करने करने के लिए टाटा ट्रस्ट्स के पराग इनिशिएटव द्वारा शुरू की गई पराग ऑनर लिस्ट की सार्थक पहल सराहनीय है। पराग ऑनर लिस्ट, बाल साहित्य की किताबों की एक ऐसी लिस्ट होती है जिसमें नामचीन प्रकाशकों द्वारा विविध भाषाओं में प्रकाशित की गई किताबों में से चुनकर बाल साहित्य की बेहतरीन किताबें शामिल की जाती है। इनका चयन बाल साहित्य के अनुभवी विशेषज्ञ करते हैं।

बेहतरीन किताबों को चुनने की प्रक्रिया श्रमसाध्य और समय लेने वाली होती है। इसकी शुरुआत टाटा ट्रस्ट्स के पराग इनिशिएटव द्वारा देश के नामी प्रकाशकों से कैलेंडर वर्ष विशेष में प्रकाशित भाषा विशेष की मौलिक बाल साहित्य की किताबें पराग ऑनर लिस्ट हेतु चयन के लिए आमंत्रित करके की जाती हैं। जो भी किताबें प्राप्त होती हैं उन्हें सूचीबद्ध करके उनकी पहले चरण की स्क्रीनिंग की जाती है। इनमें से जो किताबें, आमंत्रित करने के तयशुदा नियमों पर खरी नहीं होती हैं, उन्हें सूची से अलग करके अन्य सभी किताबें विस्तृत समीक्षा के लिए अलग-अलग योग्यता और बैकग्राउंड के बाल साहित्य विद्वानों की तीन सदस्यीय निर्णायक समिति के पास समीक्षा के लिए भेजी जाती हैं। ये सदस्य स्वतंत्र रूप से किताबों को श्रेष्ठ बाल साहित्य की कसौटियों पर जाँचते-परखते हैं। एक-एक किताब को संजीदगी से पढ़ते हैं। यह देखा जाता है कि किताब की विषयवस्तु क्या है ? इसे कैसे प्रस्तुत किया गया है ? क्या इनमें नयापन है ? इसका बाल पाठकों या किशोरों के लिए क्या निहितार्थ है ? इन कसौटियों में बच्चे को देखने का दृष्टिकोण और सन्दर्भ, अच्छे साहित्य का दृष्टिकोण, भाषा और चित्रों की प्रस्तुति आदि पर गौर किया जाता है। किताब से बच्चों के जुड़ाव, उनके सोचने, विचारने, आनन्द लेने के कितने मौके बनते हैं ? क्या प्रस्तुत रचनाओं में बच्चों के लिए कल्पना करने, कुछ रचने और निरन्तर पढ़ने की उत्सुकता और संभावनाएँ बनती है व साहित्य की विविध विधाओं और आधुनिक मूल्यबोध के लिए कितनी जगह है, आदि। बाल पाठकों में साहित्य के प्रति रसिकता का भाव पैदा करने और समालोचक पाठक बनने के कितने अवसर बनते हैं।

इस प्रकिया के उपरान्त निर्णायक समिति एक-एक पुस्तक के बारे में अपनी राय देते हुए निर्णय लेती है कि वे कौन सी बेहतरीन किताबें हैं जिन्हें पराग ऑनर लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए और बताती है कि क्यों। किसी किताब के बारे में किसी भी समिति सदस्य की असहमति होने पर बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है।

पराग ऑनर लिस्ट, पाठकों, शिक्षकों, माता-पिता, लेखकों और समीक्षकों के साथ ही शिक्षा संस्थाओं, पुस्तकालयों और जन सामान्य के लिए बाल साहित्य की श्रेष्ठ किताबों की जानकारी का भरोसेमंद स्रोत है।

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